Saturday, May 30, 2020

विश्व का सबसे महान वैज्ञानिक 'स्टीफन हॉकिंग'

"में अभी और जीना चाहता हूं" ये किसी और का कथन नहीं है। विश्वके महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का है। जिसे उन्होंने अपने 70 वे जन्म दिन पर कहा था। जिसे सुनकर दुनिया एक पल के लिए अचंभित हो गयी थी। तो आयी ऐ आज हम ऐसे महान वैज्ञानिक की बात करते हैं।

स्टीफन हॉकिंग का जन्म :-

स्टीफन हॉकिंग का जन्म ८ जनवरी १९४२ को ऑक्सफोर्ड में फ्रैंक और इसाबेल एलेन हॉकिंग के घर हुआ था। स्टीफन हॉकिंग और गलीलियो गलीलेइ की जन्म तिथि एक ही है।

बचपन से ही हॉकिंग बड़े बुद्धि मान थे। उनके वक्तव्य ऐसे थे जो लोगो को चौका देते थे। बचपन में लोगो उन्हें आइंस्टीन कहके बुलाते थे। जब हॉकिंग पैदा होने वाले थे तब परिवार लंडन में था। लेकिन दूसरे युद्ध के कारण वो ओक्सफ़ोर्ड में आकर बस गये। स्टीफन जब आठ वर्ष के थे तब उनके परिवार वाले सेंट अल्बान में आकर रहने लगे।

स्टीफन हॉकिंग की शिक्षा :-

सेंट अल्बान के ही एक स्कूल में स्टीफन का दाखिला करवा दिया गया। उनके पिता उन्हें डॉक्टर बनना चाहते थे। लेकिन उनको गणित विषय में रुचि थी। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद स्टीफन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और यहां पर इन्होंने भौतिकी (Physics) विषय पर अध्ययन किया।

कहा जाता है कि स्टीफन को गणित विषय में रुचि थी और वो इसी विषय में अपनी पढ़ाई करना चाहते थे. लेकिन उस वक्त ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ये विषय नहीं हुआ करता था। जिसके कारण उन्हें भौतिकी विषय को चुनना पड़ा।

भौतिकी विषय में प्रथम श्रेणी में डिग्री हासिल करने बाद इन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी आगे की पढ़ाई की। साल 1962 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड मैथेमैटिक्स एंड थ्योरिटिकल फिजिकल (डीएएमटीपी) में इन्होंने ब्रह्माण्ड विज्ञान पर अनुसंधान किया।

साल 1963 में खराब हुई सेहत :-

जब स्टीफन हॉकिंग 21 साल के हुए थे तब छुट्टी मनाने घर पर आए थे। जब वह सीढ़ी उतर रहे थे तब उनको बेहोसी का अहसास हुआ और वह सीढ़ी से गिर गए। उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया। शुरू में तो सबको लगा ये कमजोरी के कारण हुआ ऐसा लगा। लेकिन बार बार ऐसा होने लगा तब उनको बड़े डॉक्टरो के पास ले जाया गया। और वहा पता चला कि वो अंजान और कभी ठीक न होने वाली बीमारी से ग्रस्त है। जिसका नाम है एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (amyotrophic lateral sclerosis (ALS) )नामक बीमारी है। इस बीमारी के कारण शरीर के हिस्से धीरे-धीरे कार्य करना बंद कर देते हैं और इस बीमारी का कोई भी इलाज नहीं है।

इस लिए डॉक्टर ने कहा की हॉकिंग मात्र दो साल के मेहमान है इसे ज्यादा वो नही जी सकते हैं लेकिन हॉकिग ने अपनी इच्छा शक्ति पे पकड़ बना रखी थी और कहा में 10..20….30 नहीं पूरे पचास साल जीऊंगा और आज दुनिया इसकी साक्षी है कि जो हॉकिंग ने कहा था वो कर दिखाया। जिस वक्त स्टीफन को इस बीमारी का पता चला था उस वक्त वो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन उन्होंने अपनी इस बीमारी को अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया। बीमार होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को पूरा किया और साल 1965 में उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की।

स्टीफन हॉकिंग की पत्नी

जिस साल स्टीफन को अपनी बीमारी के बारे में पता चला उसी साल उन्होंने अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से साथ विवाह किया। हॉकिंग के इस बुरे वक्त में जेन ने उनका साथ दिया और साल 1965 में इन्होंने शादी कर ली। उस उनका दाहिना हिंसा पूरी तरह से खराब हो चुका था और वो स्टिक के सहारे चलते थे। जेन और हॉंकिग के कुल तीन बच्चे थे और इनके नाम रॉबर्ट, लुसी और तीमुथियस है। हॉकिंग की ये शादी 30 सालों तक चली थी और साल 1995 में जेन और हॉकिंग ने तलाक ले लिया था। जेन का तलाक लेने का कारण था की वो एक धार्मिक स्त्री थी जबकि हॉकिंग हर वख्त भगवान के अस्तित्व को चुनोती देते थे। जिस के कारण उनकी काफी आलोचना भी हुई। लेकिन उन पर ध्यान दिये बिना हॉकिंग अपनी खोजो पे आगे बढ़ते गए।

तलाक लेने के बाद हॉकिंग ने ऐलेन मेसन(Elaine Mason) से विवाह कर लिया था और साल 1995 में हुई ये शादी साल 2016 तक ही चली थी।

स्टीफन हॉकिंग का करियर

कैम्ब्रिज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी हॉकिंग इस कॉलेज से जुड़े रहे और इन्होंने एक शोधकर्ता के रूप में यहां कार्य किया। इन्होंने साल 1972 में डीएएमटीपी में बतौर एक सहायक शोधकर्ता अपनी सेवाएं दी और इसी दौरान इन्होंने अपनी पहली अकादमिक पुस्तक, ‘द लाज स्केल स्ट्रक्चर ऑफ स्पेस-टाइम’ लिखी थी। यहां पर कुछ समय तक कार्य करने के बाद साल 1974 में इन्हें रॉयल सोसायटी (फैलोशिप) में शामिल किया गया। जिसके बाद इन्होंने साल 1975 में डीएएमटीपी में बतौर गुरुत्वाकर्षण भौतिकी रीडर के तौर पर भी कार्य किया और साल 1977 में गुरुत्वाकर्षण भौतिकी के प्रोफेसर के रूप में भी यहां पर अपनी सेवाएं दी।वहीं इनके कार्य को देखते हुए साल 1979 में इन्हें कैम्ब्रिज में गणित के लुकासियन प्रोफेसर (Lucasian Professor) नियुक्त किया गया था, जो कि दुनिया में सबसे प्रसिद्ध अकादमी पद है और इस पद पर इन्होंने साल 2006 तक कार्य किया।

स्टीफन हॉकिंग द्वारा किए गए कार्य

  • प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले बुनियादी लॉ पर कई शोध किए हैं। हॉकिंग ने अपने साथी रोजर पेनरोस के साथ मिलकर एक शोध किया था और दुनिया को बताया था अंतरिक्ष और समय, ब्रह्मांड के जन्म के साथ शुरू हुए हैं और ब्लैक होल के भीतर समाप्त होंगे।
  • आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम थ्योरी का प्रयोग करके, हॉकिंग ने ये भी निर्धारित किया कि ब्लैक होल पूरी तरह से शांत नहीं हैं बल्कि उत्सर्जन विकिरण (emit radiation) करता है।
  • इसके अलावा हॉकिंग ने ये भी प्रस्ताव किया था कि ब्रह्मांड की कोई सीमा नहीं है और विज्ञान की मदद से ये भी पता किया जा सकता है कि ब्रह्माण्ड की शुरूआत कब हुई थी और कैसे हुई थी।

हॉकिंग द्वारा लिखी गई सबसे पहली किताब का नाम ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ था। ये किताब बिग बैंग और ब्लैक होल के विषय पर आधारित थी और साल 1988 में प्रकाशित हुई ये किताब 40 भाषाओं में उपलब्ध है। जिसने दुनिया भरके विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया था।

स्टीफन हॉकिंग को कई पुरस्कारो से भी समानित किया गया है। उन्होंने कई किताबें भी लिखी है।

स्टीफन हॉकिंग के जीवन पर बनीं फिल्म

साल 2014 में इन पर एक मूवी बनाई गई, जिसका नाम नाम “द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’ हैं। इस फिल्म में उनकी जिंदगी के संघर्ष को दिखाया गया था और बताया गया था कि किस तरह से इन्होंने अपने सपनों के पूरा किया था।

स्टीफन हॉकिंग की मृत्यु

हॉकिंग लंबे समय से बीमार चल रहे थे। एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस बीमारी के कारण इन्होंने अपने जीवन के लगभग 53 साल व्हील चेयर पर बताए हैं। वहीं 14 मार्च को इस महान वैज्ञानिक ने अपनी अंतिम सांस इग्लैंड में ली है और इस दुनिया से विदाई ले ली। लेकिन वैज्ञानिक में इनके द्वारा दिए गए योगदानों को कभी भी भुला नहीं जा सकेगा।

स्टीफन हॉकिंग कहा करते थे कि अगर आप हमेशा नाराज़ रहेंगे एवं अपने आपको कोसते ही रहेंगे तो किसी के पास आपके लिए टाइम नहीं होगा।


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